Part of life
की तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं,
मै जनता हु ना मिलेंगे हम दोनों लैकिन कैसे भूल जाऊं !
क्या बोलूँ तुम्हे, छाया या हम छाया,
या वह किरण जिससे जीवन जगमगाया
समझ मे नही आता की तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!
दूर ही सही मैं तुम से और ना मिलने की आदत है,
फिर भी दिल को कैसे समझाहुँ !
क्या नाम दूँ ,इस दुरी को कैसे इस दुरी को मिटाऊं,
इतना मुश्किल भी नहीं, पर मज़बूरी को कैसे छुपाऊ!
समझ मे नही आता तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!
समझ मे नही आता तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!
की तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं,
मै जनता हु ना मिलेंगे हम दोनों लैकिन कैसे भूल जाऊं !
क्या बोलूँ तुम्हे, छाया या हम छाया,
या वह किरण जिससे जीवन जगमगाया
समझ मे नही आता की तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!
दूर ही सही मैं तुम से और ना मिलने की आदत है,
फिर भी दिल को कैसे समझाहुँ !
क्या नाम दूँ ,इस दुरी को कैसे इस दुरी को मिटाऊं,
इतना मुश्किल भी नहीं, पर मज़बूरी को कैसे छुपाऊ!
समझ मे नही आता तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!
समझ मे नही आता तेरे इस रिश्ते को कैसे निभाऊं!